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भारत छोड़ो आंदोलन के 83 साल पूरे

डोमचांच में शहीद हुए थे आजादी के चार दीवाने

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भारत छोडो आन्दोलन को 83 साल हो गए हैं। वर्ष 1942 का 9 अगस्त कोडरमा जिले के डोमचांच के लिए अविस्मरणीय है। इस दिन आजादी के दीवाने जुटे थे डोमचांच के तीमुहाने वाले चौक पर, अपनी आवाज बुलन्द करने और देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराने के लिये। तब अंग्रेजों ने दमन के लिये जो कुछ किया उसका गवाह आज भी डोमचांच का वह चौक है जिसे शहीद चौक कहते हैं। आज भी शहीद चौक आजादी के दीवानों की दास्तां सुना रहा है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कोडरमा जिले के वीर सपूतों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, और देश की आजादी की खातिर अपनी कुर्बानियां दी। सन 1942 में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ भारत छोडो आन्दोलन डोमचांच सहित झुमरीतिलैया एवं कोडरमा में काफी जोर पकडा और डोमचांच आन्दोलनकारियों का गढ बना। आन्दोलनकारियों ने 8 अगस्त 1942 को डाकघर और कलाली को फूंक दिया था। पुनः 9 अगस्त को आन्दोलनकारी जमा हुए थे, आंदोलन को कुचलने के लिए तत्कालीन आरक्षी अधीक्षक जी रसल ने आन्दोलनकारियों पर लाठी-गोलियां चलवायी। पहले लाठी चली पर आजादी के दीवानों को कहां इसकी परवाह थी। तभी अचानक गोलियां चलने लगी, लोग तीतर बितर हुए और जब धुंध छटी तो आजादी की इस लडाई में डोमचांच के नुनमन धोबी, चुरामन मोदी शहीद हो चुके थे। वहीं मंगर साव और उदित नारायण मेहता को भी गोली लगी जिनकी बाद में मौत हो गयी। घटनास्थल पर इन वीर सपूतों के स्मारक बनवाये गए और इस चौक का नाम शहीद चौक रखा गया। डोमचांच का शहीद चौक अब भी प्रेरणा का स्त्रोत बना हुआ है पर इसे विकसित कर राष्ट्रीय धरोहर बनाने की दिशा में अबतक कोई पहल नही हो सकी है। 1942 में करो या मरो आंदोलन में विश्वनाथ मोदी भूमिगत आंदोलनकारी थे। डोमचांच में 9 अगस्त के आन्दोलन के बाद इनको पुलिस ने पकड़ लिया था और एसपी रसल ने चाबुक से इतना पीटा कि ये मरणासन्न हो गये। इन्हें मरा समझ कर ट्रक पर फेंक दिया गया था। हालांकि इनकी सांस चल रही थी। बाद में इनका इलाज कराया गया। जब लोगों को इनके जिंदा रहने की खबर मिली तो इलाके में दीये जलाये गये थे। ये कोडरमा से तीन बार 1967, 1969 और 1977 में विधायक चुने गए। वर्ष 2011 के 14 फरवरी को विश्वनाथ मोदी का निधन हो गया था।

राष्ट्रीय धरोहर बनाने की जरूरत

डोमचांच स्थित शहीद स्मारक को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी भी आजादी के दीवानों को जाने और प्रेरणा ले सके। हाल के वर्षों में विधायक डॉ नीर यादव ने इसे संरक्षित करते हुए सौंदर्यीकरण कराया है, पर अब भी सरकार के स्तर से और विकसित किए जाने की जरूरत है।

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